बड़ों की बात मानो




टूटा हुआ घोड़ा

टीना एक 6 साल की प्यारी सी लड़की थी। वह लकड़ी के खिलौनों की बहुत शौकीन है, खासकर जब वह अपने चाचा द्वारा 2 साल की उम्र में उपहार में दिया गया था एक सुंदर लकड़ी का घोड़ा था। लकड़ी का घोड़ा उसका करीबी पाल और उसका पालतू जानवर है। उसका एक 9 साल का भाई है। वह अपने परिवार के साथ जंगल में एक प्रकृति रिज़ॉर्ट में जश्न मना रहा था। वह लकड़ी के घोड़ों को अपने साथ ले गई। वह जंगल में अपने परिवार के साथ अपनी छुट्टी का आनंद लेती थी। जब वह अपने भाई के साथ सामान पैक कर रही थी, जब उन्होंने घर लौटने की योजना बनाई, तो लकड़ी का घोड़ा नीचे गिर गया और उसका एक धागा बन गया। टीना बहुत दुखी थी और चुपचाप अपने घोड़ों के लिए रो रही थी।

वह बहुत परेशान थी। उन्होंने सभी चीजों को पैक किया और जंगल छोड़ दिया। पूरे परिवार ने प्यारी छोटी लड़की को खुश करने की कोशिश की, लेकिन टीना बहुत चुप थी, बहुत परेशान थी। टीना के भाई ने उसे बहुत दिलासा देने की कोशिश की।

लंच के लिए उनके पास एक ब्रेक था और टीना ने खाने से इनकार कर दिया था। उसके मम्मों ने उसे खाना खाने का आग्रह किया, उसने बहुत कम मात्रा में खाना खाया।

जब अन्य लोग भोजन कर रहे थे, वह चुपचाप अपनी कार में बैठ गई। उसका भाई उसके पास आया और उसकी गाल को चूमा, उसने बताया,
'टीना प्रिय, चिंता मत करो, प्रिय मत उठो। यह केवल एक लकड़ी का खिलौना है। घोड़े के पास हमारी तरह जीवन नहीं है और यह सिर्फ एक बेजान चीज है। टूटे पैर के लिए इतना दुखी मत बनो। यहाँ तक कि अगर घोड़ा अपनी पूंछ खो देता है, तो यह घोड़े को चोट नहीं पहुंचेगी। चार पैर टूट जाने पर भी लकड़ी का घोड़ा एक ही रहता है। यहाँ तक कि अगर घोड़ा अपना सिर खो देता है, तो यह दर्दनाक नहीं होगा। मैं तुम्हारे लिए एक नई लकड़ी का घोड़ा खरीदूंगा! '

टीना ने जवाब दिया, 'आपको लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मेरे पालतू खिलौने का एक पैर टूट गया है?'
उसके भाई ने उत्तर दिया, 'हाँ प्रिय!'

टीना ने जवाब दिया, 'हां भाई आप सही कह रहे हैं। भले ही इस उम्र में घोड़े को टुकड़ों में तोड़ दिया जाए, यह आपके लिए एक बड़ा मुद्दा नहीं होगा। लेकिन अगर आप मेरी उम्र के हैं, अगर आपके पास मेरे जैसा एक पालतू जानवर था, तो आपको लगेगा कि घोड़े का एक छोटा सा हिस्सा टूट जाने पर भी कितना दर्द होगा! '
उसका भाई चुपचाप निकल गया!

टीना की तरह ही, हर किसी के अलग-अलग पहलू अलग-अलग होते हैं। जिसे हम महत्व नहीं देते थे, वह किसी का कष्ट होगा! 

सेवाभावी की कसौटी





चन्द्रमाँ के प्रकाश में

महामहिम ने एक बटरकप उठाया, और उसे अपनी ठुड्डी तक पकड़ लिया। "क्या आपको मक्खन पसंद है?" उसने पूछा।

"मक्खन!" उसने कहा। "वे मक्खन में नहीं बने हैं। उन्हें महारानी के लिए मुकुट में बनाया गया है; वह हर सुबह एक नया है।"

"मैं तुम्हें एक मुकुट बनाऊंगा," उन्होंने कहा। "आप इसे रात को पहनेंगे।"

"लेकिन मेरा सिंहासन कहाँ होगा?" उसने पूछा।

"यह मकई-क्षेत्र द्वारा स्टाइल के मध्य चरण पर होगा।"

इसलिए जब चाँद उगा तो मैं बाहर देखने गया।

उन्होंने लाल जैकेट और उसमें टोपी के साथ अपनी टोपी पहनी थी। उसके सिर पर बटरकप की माला थी; यह ताज जैसा नहीं था। पुष्पांजलि के एक तरफ कुछ डेज़ी थीं, और दूसरी तरफ ब्लैकबेरीबेरीब्लॉस का एक छोटा गुच्छा था।

"आओ और चाँदनी में नाचो," उन्होंने कहा; इसलिए वह स्टिल के ऊपर चढ़ गई और कॉर्न-फील्ड में अपने दोनों हाथों को पकड़कर खड़ी हो गई। वह उन्हें अपने में ले गया, और फिर उन्होंने पूरे रास्ते में गोल-गोल घूमते हुए नृत्य किया, जबकि गेहूं ने दोनों तरफ बुद्धिमानी से सिर हिलाया और पोप जाग गए और आश्चर्यचकित हो गए। वे दूर-दूर तक फैले हुए विस्तृत हरे घास के मैदानों की ओर मकई-खेत से होते हुए गए। पर और पर, वह खुशी के लिए चिल्ला रहा था, और वह इतनी गंभीरता से हंस रही थी कि आवाज लकड़ी के किनारे तक गई, और सिंहासन ने सुना, और वसंत का सपना देखा। वे चलते-चलते, और गोल-गोल, अपनी लाल जैकेट में, और वह अपने पुष्पों से एक-एक करके जंगली फूलों को गिराती गई। चांदनी में पर और पर, जब तक वे मकई-मैदान में सभी नाचते थे, जब तक कि वे हरी घास के मैदानों को पार नहीं कर चुके थे, जब तक वे धुंध से परे छिपे हुए थे।

मुझे बस इतना ही मालूम है; लेकिन मुझे लगता है कि दूर कहीं दूर, जहां चाँद चमक रहा है, वह और वह अभी भी एक मकई-मैदान के साथ नृत्य करते हैं, वह अपनी लाल जैकेट में है, और वह अपने बालों से जंगली फूलों को छोड़ रही है

वरदान का इस्तेमाल

वरदान का इस्तेमाल



एक बार एक व्यक्ति ने घोर तपस्या करके भगवान को प्रसन्न कर लिया। भगवान ने उसकी तपस्या से प्रसन्न

होकर उसे वर दिया कि जीवन में एक बार सच्चे मन से जो चाहोगे वही हो जाएगा।

उस व्यक्ति के जीवन में अनेक अवसर आए, जब वह इस वरदान का इस्तेमाल कर अपने जीवन को सुखी बना सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। कई बार भूखों मरने की नौबत आई, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ।

अनेक ऐसे अवसर भी आए, जब वह इस वरदान का प्रयोग कर देश की काया पलट कर सकता था, अथवा समाज को खुशहाल बना सकता था, लेकिन उसने ऐसा भी नहीं किया। वह उस अवसर की तलाश में था जब मौत

आएगी और वह अपने वरदान का इस्तेमाल कर अमर हो जाएगा और दुनिया को दिखा देगा कि अपने वरदान का उसने कितनी बुद्धिमत्ता से इस्तेमाल किया है। लेकिन मौत तो किसी को सोचने का अवसर देती नहीं। उसने चुपके से एक दिन उसे आ दबोचा। उस का वरदान धरा का धरा रह गया।

मौत से पहले जी लेने का अर्थ है अपनी सामर्थ्य अथवा इन नेमतों का सदुपयोग कर लेना। और यह बेहद जरूरी है और अभी करना जरूरी है। बाद में तो कोई अवसर मिलने से रहा। ये दौलत, ये बाहुबल, ये सत्ता की ताकत कुछ भी साथ नहीं जाने वाला। जिन के लिए ये सब कर रहे हो उन के भी काम नहीं आने वाला है। 

ज्ञान की प्यास

ज्ञान की प्यास



उन दिनों महादेव गोविंद रानडे हाई कोर्ट के जज थे। उन्हें भाषाएँ सीखने का बड़ा शौक था। अपने इस शौक के कारण उन्होंने अनेक भाषाएँ सीख ली थीं; किंतु बँगला भाषा अभी तक नहीं सीख पाए थे। अंत में उन्हें एक उपाय सूझा। उन्होंने एक बंगाली नाई से हजामत बनवानी शुरू कर दी। नाई जितनी देर तक उनकी हजामत बनाता, वे उससे बँगला भाषा सीखते रहते।

रानडे की पत्नी को यह बुरा लगा। उन्होंने अपने पति से कहा, ‘‘आप हाई कोर्ट के जज होकर एक नाई से भाषा सीखते हैं। कोई देखेगा तो क्या इज्जत रह जाएगी ! आपको बँगला सीखनी ही है तो किसी विद्वान से सीखिए।’’

रानडे ने हँसते हुए उत्तर दिया, ‘‘मैं तो ज्ञान का प्यासा हूँ। मुझे जाति-पाँत से क्या लेना-देना ?’’

यह उत्तर सुन पत्नी फिर कुछ न बोलीं।

ज्ञान ऊँच-नीच की किसी पिटारी में बंद नहीं रहता।

इस मूर्ति का कलाकार कौन?

इस मूर्ति का कलाकार कौन?



सुकरात के समय की बात है, उस समय उनके शहर में एक प्रदर्शनी लगी हुई थी। प्रदर्शनी में ग्रीक देवता अपोलो की भव्य मूर्ति स्थापित की गई थी। इस मूर्ति को देखने के लिए यूनान के प्रमुख व्यक्ति जिनमें राजा पैरीक्लीज, रानी एस्पेसिया, विद्वान सोफोक्लीज और स्वयं सुकरात वहां आए हुए थे।

मूर्ति इतनी सुंदर थी कि जो भी उसे देखता तो मूर्ति बनाने वाले कलाकार की प्रशंसा जरूर करता। लेकिन जब कलाकार का नाम राजा पैरीक्लीज ने जानना चाहा। तब वहां उपस्थित लोगों में सन्नाटा सा छा गया। सब हैरान थे। इतनी सुंदर मूर्ति बनाने वाला कलाकार कहां गुम था।

राजा के आदेश पर कलाकार को खोजने के लिए काफी मशक्कत की गई। बड़ी ही कोशिश करने के बाद सैनिकों ने कलाकार को खोज निकाला, वह एक अश्वेत रंग का व्यक्ति था और वह गुलाम था। इस गुलाम ने भगवान अपोलो की पवित्र मूर्ति को बनाया था।

दर्शक दीर्घा में कुछ धर्मगुरु भी खड़े हुए थे। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगे। यह अनर्थ हो गया है। कोई गुलाम भगवान अपोलो की मूर्ति को कैसे बना सकता है? इसे तो दंड मिलना चाहिए। इसके हाथ शरीर से अलग कर देना चाहिए।

राजा को धर्मगुरुओं की यह बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। उन्होंने कहा, 'भगवान की इतनी सुंदर मूर्ति बनाने वाले के साथ इतना क्रूर में नहीं हो सकता।' राजा पैरीक्लीज आगे बड़े और उस अश्वेत गुलाम के दोनों हाथों को पकड़कर उसकी हथेलियों को चूम लिया।

इस तरह चाटूकार धर्मगुरु अपनी बात से तुरंत पलट गए और राजा के न्याय की प्रशंसा करने लगे। इस तरह उस कलावान गुलाम को सम्मानित और गुलामी की दास्तां से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त कर दिया गया।

संक्षेप में

सम्मान हमेशा कला और ज्ञान का होता है। और राजा पैरीक्लीज ने ऐसा ही किया वह एक महान न्याय प्रिय राजा थे।

हनुमानासन

हनुमानासन




आसन के लिए फर्श पर दरी या चटाई बिछाकर खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नीचे बैठ जाएं।

आसन के अभ्यास की विधि-

आसन के लिए फर्श पर दरी या चटाई बिछाकर खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नीचे बैठ जाएं। दोनों घुटनों को सामने फर्श पर टिका कर रखें तथा पंजों पर बैठ जाएं। अब बाएं पैर को धीरे-धीरे पीछे की ओर तथा दाएं पैर को आगे की ओर फैलाएं। इस आसन की शुरुआत में पैरों को जितना सम्भव हो उतना फैलाने की कोशिश करें। आरम्भ में शरीर का संतुलन बनाएं रखने के लिए दोनों हथेलियों का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें दोनों पैरों को इतना फैला दें की नितम्ब (हिप) फर्श से सट जाएं। आसन की इस स्थिति में आने के बाद अपने हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़कर सामने की तरफ रखें। 2 मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आकर 2 मिनट तक आराम करें। इसके बाद बाएं पैर को आगे की ओर तथा दाएं पैर को पीछे की और फैलाएं। हाथों की स्थिति पहले की तरह ही रखते हुए पुन: इस क्रिया को करें। इस तरह इस आसन को दोनों पैरों से बदल-बदलकर करें और दोनों पैरों से इस क्रिया को 2-2 बार करें। 

इसके अभ्यास से बस्ति प्रदेश (नाभि के नीचे का हिस्सा) की हड्डियां लचीली होती हैं। यह साइटिका का दर्द (गृधसी) या स्नायुशूल (नर्वस सिस्टम का दर्द) हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

इस आसन से रोगों में लाभ-

इसके अभ्यास से बस्ति प्रदेश (नाभि के नीचे का हिस्सा) की हड्डियां लचीली होती हैं। यह साइटिका का दर्द (गृधसी) या स्नायुशूल (नर्वस सिस्टम का दर्द) हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। यह आसन हाथ व पैरों के स्नायुओं को अधिक शक्तिशाली बनाता है। इससे कमर पतली व जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। 

इस आसन से स्त्रियों के अनेक रोग जैसे मासिकधर्म सम्बंधी परेशानी व रक्तस्राव आदि रोग दूर होते हैं।

सावधानी-

ध्यान रखें कि इस आसन को आरम्भ में करना कठिन होता है अत: शुरू में जितना पैर फैलाना सम्भव हो पैरों को फैलाएं और धीर-धीरे इस आसन को पूरा करने की कोशिश करें। इसकी अच्छी शुरुआत के लिए पहले किसी योग शिक्षक की देख-रेख में अभ्यास करें।