हनुमानासन
आसन के लिए फर्श पर दरी या चटाई बिछाकर खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नीचे बैठ जाएं।
आसन के अभ्यास की विधि-
आसन के लिए फर्श पर दरी या चटाई बिछाकर खड़े हो जाएं। फिर दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर नीचे बैठ जाएं। दोनों घुटनों को सामने फर्श पर टिका कर रखें तथा पंजों पर बैठ जाएं। अब बाएं पैर को धीरे-धीरे पीछे की ओर तथा दाएं पैर को आगे की ओर फैलाएं। इस आसन की शुरुआत में पैरों को जितना सम्भव हो उतना फैलाने की कोशिश करें। आरम्भ में शरीर का संतुलन बनाएं रखने के लिए दोनों हथेलियों का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें दोनों पैरों को इतना फैला दें की नितम्ब (हिप) फर्श से सट जाएं। आसन की इस स्थिति में आने के बाद अपने हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़कर सामने की तरफ रखें। 2 मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आकर 2 मिनट तक आराम करें। इसके बाद बाएं पैर को आगे की ओर तथा दाएं पैर को पीछे की और फैलाएं। हाथों की स्थिति पहले की तरह ही रखते हुए पुन: इस क्रिया को करें। इस तरह इस आसन को दोनों पैरों से बदल-बदलकर करें और दोनों पैरों से इस क्रिया को 2-2 बार करें।इसके अभ्यास से बस्ति प्रदेश (नाभि के नीचे का हिस्सा) की हड्डियां लचीली होती हैं। यह साइटिका का दर्द (गृधसी) या स्नायुशूल (नर्वस सिस्टम का दर्द) हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
इस आसन से रोगों में लाभ-
इसके अभ्यास से बस्ति प्रदेश (नाभि के नीचे का हिस्सा) की हड्डियां लचीली होती हैं। यह साइटिका का दर्द (गृधसी) या स्नायुशूल (नर्वस सिस्टम का दर्द) हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। यह आसन हाथ व पैरों के स्नायुओं को अधिक शक्तिशाली बनाता है। इससे कमर पतली व जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।इस आसन से स्त्रियों के अनेक रोग जैसे मासिकधर्म सम्बंधी परेशानी व रक्तस्राव आदि रोग दूर होते हैं।
